1 अप्रैल से शेयर बाजार में बड़ा बदलाव, निवेशकों पर होगा असर

By | March 28, 2019

आगामी 1 अप्रैल से भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. इस बदलाव के तहत अब सिर्फ डीमैट फॉर्म से शेयरों की खरीद – बिक्री होगी.

अगर आप शेयर बाजार में शेयरों की खरीद-ब्रिकी करते हैं तो आपके लिए जरूरी खबर है. दरअसल, 1 अप्रैल से लिस्‍टेड कंपनियों के शेयरों का ट्रांसफर सिर्फ इलेक्‍ट्रॉनिक फॉर्म में ही किया जा सकेगा. हालांकि जिन निवेशकों के पास फिजिकल फॉर्म में शेयर हैं, वे इसे रख सकेंगे.

भारतीय प्रतिभूति एवं विनमय बोर्ड (सेबी) की ओर से कहा गया, ”निवेशकों के अपने पास शेयरों को फिजिकल रखने पर पाबंदी नहीं होगी. हालांकि, अगर कोई निवेशक फिजिकल रखे शेयरों को ट्रांसफर करना चाहता है तो 1 अप्रैल 2019 के बाद ऐसा शेयरों के डीमैट रूप में होने के बाद ही किया जा सकेगा.

बता दें कि शेयरों को अनिवार्य रूप से डीमैट या इलेक्‍ट्रॉनिक रूप में ट्रांसफर का निर्णय मार्च 2018 में किया गया था. सेबी ने दिसंबर 2018 में इलेक्‍ट्रॉनिक शेयर ट्रांसफर की समयसीमा बढ़ाकर 1 अप्रैल कर दी थी. अब सेबी ने इस समयसीमा को आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय किया गया है. यानि यह नियम 1 अप्रैल 2019 से लागू होगा. सेबी का कहना है कि डीमैट फॉर्म में शेयरों की खरीद-बिक्री से कंपनियों की शेयरहोल्डिंग का रिकॉर्ड पारदर्शी होगा. इसके अलावा कंपनियों के स्वामित्व को लेकर विवाद में कमी आएगी.

क्‍या है शेयरों का फिजिकल फॉर्म

पहले किसी कंपनी के शेयर खरीदने पर निवेशकों को शेयर प्रमाण पत्र दिया जाता था. इसे ही फिजिकल शेयर कहते हैं, यह प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं होती है. लेकिन फिजिकल शेयर को डीमैट फॉर्म में बदलने के लिए निवेशकों को पहले एक डीमैट अकाउंट ओपन करवाना होगा. डीमैट अकाउंट ओपन करवाते वक्‍त निवेशक को अपनी जानकारियां देनी होगी. डीमैट अकाउंट ओपन होने के बाद उन्हें हर शेयर के लिए डीमैट रिक्वेस्ट फॉर्म भरना होगा. इसके बाद उनका फिजिकल शेयर डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर होंगे.

सेबी ने सरकार को PNB में खुली पेशकश से छूट दी

वहीं सेबी ने सरकार को पंजाब नेशनल बैंक के शेयरधारकों के लिये खुली पेशकश लाने से छूट दे दी. हालांकि, नियामक ने पूंजी डाले जाने के बाद बैंक में गैर-सार्वजनिक शेयर होल्डिंग में कटौती का निर्देश दिया. बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने फरवरी में केंद्र सरकार की तरफ से आवेदन देकर अधिग्रहण नियमन के तहत जरूरी खुली पेशकश से छूट देने की मांग की थी. सेबी नियमों के तहत अगर किसी इकाई की हिस्सेदारी एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाती है तो उसे खुली पेशकश करने की आवश्यकता होती है. पीएनबी में पूंजी डाले जाने के बाद सरकारी हिस्सेदारी 5.19 फीसदी बढ़ेगी और यह 75.41 फीसदी हो जाएगी.

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